Mughal-E-Aazam unknown facts




MUGHAL-E-AAZAM



भारत देश में हर साल १००० से भी ज्यादा फ़िल्में बनती है | कुछ फ़िल्में बड़ी होती है और कुछ फ़िल्में छोटी | लेकिन हर फ़िल्म की अपनी एक अलग पहचान होती है | हर फ़िल्म अपनी एक छाप छोड़ती है | भारतीय सिनेमा का इतिहास इस बात का गवाह है | आज के वक़्त की बात की जाए तो बाजीराव मस्तानी, पद्मावत, जोधा-अकबर, लगान और भी ऐसी कई सारी बेहतरीन काबिले तारीफ फ़िल्में जिन्होंने भारतीय सिनेमा को बुलंदियों पर पहुँचाया | लेकिन इतिहास के पन्नो में भारतीय सिनेमा का वो कोहिनूर छुपा है जिसका मुकाबला शायद ही कभी कोई फ़िल्म कर पाए – भारतीय सिनेमा इतिहास की सबसे शानदार और सबसे सफल फिल्मों में शुमार निर्देशक K.ASIF साहब की MUGHAL-E-AAZAM |


आज का ये लेख MUGHAL-E-AAZAM से जुडी उन बातों से जुड़ा हुआ है जिसके बारे में बताते हुए मुझे बेहद गर्व महसूस हो रहा है | वो बातें जो इतिहास के पन्नो में दर्ज तो है लेकिन इसके बारे में हर कोई नहीं जानता

A 16 YEARS JOURNEY (वो फ़िल्म जिसे बनने में पुरे सोलह साल का वक़्त लगा)|



MUGHAL-E-AAZAM भारतीय सिनेमा की पहली फ़िल्म जिसे बनने में पुरे १६ वर्षों का समय लगा | १९४४ से शुरू हुआ ये सफ़र १९६० में जाकर खत्म हुआ | निर्देशक K.ASIF साहब ने १९२२ में लिखे गए इम्तिआज़ अली के नाटक MUGHAL-E-AAZAM से प्रेरित होकर इस पर एक फ़िल्म बनाने का फ़ैसला किया | अमानुल्लाह खान, वजाहत मिर्ज़ा और कमल अमरोही जी के साथ मिलकर K.ASIF साहब ने फ़िल्म का SCREENPLAY लिखा |


MOST EXPENSIVE MOVIE (भारतीय सिनेमा इतिहास की सबसे महंगी फ़िल्म)



आज के वक्त में भारतीय सिनेमा में १०० करोड़ में भी फ़िल्म बन जाए तो कोई ताज्जुब की बात नहीं होती | लेकिन उस समय MUGHAL-E-AAZAM को बनने में पुरे १.५ करोड़ की लागत रही | जो आज के १०० करोड़ से कहीं ज्यादा है | फ़िल्म पुरे २५ हफ़्तों तक सिनेमा हॉल में चलती रही और इसकी कमाई लगभग ५.५ करोड़ रूपये रही | OVERALL फ़िल्म की कमाई देखी जाये तो इस फ़िल्म ने १०० करोड़ से भी ज्यादा की कमाई की | मतलब भारतीय सिनेमा की पहली फ़िल्म जिसने १०० करोड़ का दर्जा हासिल किया |


MAKING OF SHEESH MAHAL (शीश महल)


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फ़िल्म में दिखाये गए शीश महल को बनने में पुरे २ वर्ष का समय लगा | जिसमें उपयोग में लाये गये कांच के ग्लास उस वक़्त BELGIUM से मंगवाये गए थे | शीश महल में सबसे लोकप्रिय गीत प्यार किया तो डरना क्या फ़िल्माया गया | इसके ART DIRECTOR M.K SYED साहब थे |



BIGGEST CASTING OF INDIAN EPIC



IMDB की रिपोर्ट के अनुसार डी.के सपरु साहब को सलीम, नर्गिस दत्त जी को अनारकली और चन्द्र मोहन जी को अकबर का किरदार दिया गया, जिसे बाद में दिलीप कुमार जी, मधुबाला जी और पृथ्वीराज कपुर जी ने निभाया | MUGHAL-E-AAZAM निर्देशक K.ASIF द्वारा अपने पुरे फ़िल्मी सफ़र में निर्देशित की हुई २ फिल्मों में से एक थी और दूसरी फ़िल्म थी फूल जो १९४५ में बनकर तैयार हुई | इनके अलावा उनकी दो फ़िल्में जो हमेशा अधूरी रही – सस्ता खून महंगा पानी और लव एंड गॉड |



DRESS DESIGNING



IMDB की रिपोर्ट के अनुसार फ़िल्म के लिए दर्जी (TAILORS )दिल्ली से बुलवाये गए | कढ़ाई का काम करने के लिए कारीगर सूरत-ख्म्ब्यात से, सुनहार का काम करने के लिए कारीगर हैदराबाद से, ताज की कारीगरी के लिए कारीगर कोहलापुर से, लोहे के हथियार बनाने के लिए विशेषज्ञ राजस्थान से और पैरों में पहनने के जूते-चप्पलो को आगरा से बुलवाया गया |



MAJOR FACTS

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दिलीप कुमार साहब सलीम के लिए निर्देशक K.ASIF जी की पहली पसंद नहीं थे | लेकिन दिलीप साहब फ़िल्म के निर्माताओं को मनाने में कामयाब हुए | उसी तरह अनारकली का किरदार पहले सुरैया जी (SURAIYAA) को दिया गया जो बाद में मधुबाला जी के पास गया | पृथ्वीराज कपूर साहब, जिन्होंने अकबर का किरदार निभाया, वे एक SCENE के लिए १९ retakes लेते थे | WEBCITATION.ORG  की रिपोर्ट के अनुसार महान तबला वादक ज़ाकिर हुसैन साहब को युवा सलीम का किरदार निभाने के लिए दिया गया, जिसे बाद में जलाल आघा जी ने निभाया | बाद में जलाल आघा साहब को हमनें फ़िल्म शोले के मशहुर गीत महबूबा-महबूबा में देखा |



JOURNEY



फ़िल्म की शुरुआत १९४४ में हुई पर इसे बनने में कई साल लगे | इसके पीछे कई सारे कारण है | पहला तो ये की फ़िल्म के निर्माताओं का पीछे हट जाना और दूसरा फ़िल्म की कास्टिंग (CASTING) में बार-बार बदलाव होना | फ़िल्म में होने  वाले खर्चों का पता इसी से चलता है कि फ़िल्म का एक गीत ही अपने आप में इतना महंगा था कि उस BUDGET में उस समय कोई और फ़िल्म पूरी बनाई जा सकती थी | आखिरकार इसे साल १९६० में प्रदर्शित किया गया जिसने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए | फ़िल्म देखने के लिए इतनी भीड़ लगती थी कि  लोग २ दिन पहले से ही TICKET के लिए लाइन में लगे रहते थे | भारतीय सिनेमा इतिहास की सबसे कामयाब फ़िल्म का सफ़र लगभाग १५ साल तक लगातार चलता रहा |



SONG PYAAR KIYA TO DARNA KYA  



फ़िल्म के गीत प्यार किया तो डरना क्या को TECHNICOLOR में फ़िल्माया गया और निर्देशक ASIF चाहते थे कि पूरी फ़िल्म को वापस TECHNICOLOUR में RESHOOT किया जाए, लेकिन निर्माताओं के मना कर देने के बाद इसे आधा ही TECHNICOLOUR में SHOOT किया जा सका | महान संगीतकार नौशाद (NAUSHAD) ने अपने एक INTERVIEW के दौरान कहा था कि उन्होंने गीतकार शकील बदायुनी जी के साथ मिलकर कई दिनों तक एक कमरे में बंद रहकर गीतों के लिए पुरे ११० ड्राफ्ट (DRAFT) तैयार किये | आखिरकार उन्होंने भारतीय सिनेमा को सदाबहार गीत प्यार किया तो डरना क्या दिया |      



SINGERS


निर्देशक K.ASIF साहब चाहते थे की बड़े ग़ुलाम अली साहब इस फ़िल्म के गीतों को अपनी आवाज़ दे | पर वे गीत गाने के लिए राज़ी नहीं हुए | ये वो वक़्त था जब महान गायक लता जी को एक गीत गाने के लिए ३००-४०० रूपये दिए जाते थे | उस समय K. ASIF जी ने उन्हें अपनी फ़िल्म में गीत गाने के लिए लगभग २५,००० रुपयों का OFFER दिया जिसे ग़ुलाम अली साहब इन्कार न कर सके |



WAR SCENE



फ़िल्म में दिखाए गए युद्ध में जहाँ अकबर और सलीम का आमना- सामना होता है | उसके लिए २००० ऊँट, ४००० घोड़े और लगभग ८००० सैनिकों का उपयोग किया गया | यहाँ तक की फ़िल्म के इस युद्ध SCENE में इंडियन आर्मी (INDIAN ARMY) के सैनिकों को भी लाया गया ताकि युद्ध के SCENE असली दिखाई दें | भगवान् कृष्ण की दिखाई गयी मूर्ति को पूरा सोने से बनवाया गया | फ़िल्म को तीन अलग-अलग भाषाओँ में प्रदर्शित किया गया – हिंदी, तमिल, ENGLISH |



 
DEDICATION



पृथ्वीराज कपुर साहब के DEDICATION की मिसाल इसी बात से दी जा सकती है कि उन्होंने पुरे ८ साल एक मात्र इसी फ़िल्म को दिए | जब कपुर साहब को अकबर का किरदार दिया गया उस वक़्त वे अपने STARDUM पर थे | पर अकबर का किरदार मिलने के बाद न सिर्फ उन्होंने अपना काफी वज़न बढाया, बल्कि १९५२ से लेकर १९६० तक एक मात्र इसी फ़िल्म को वक़्त दिया |



EPIC LOVE STORY

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इस ऐतिहासिक फ़िल्म के महान फ़िल्म बनने का एक कारण और था – दिलीप कुमार साहब और मधुबाला जी की अमर प्रेम कहानी | वे दोनों एक दुसरे से बेहद प्रेम करते थे, पर समाज की बंदिशों और मधुबाला जी के पिता की ज़िद ने दोनों को एक-दुसरें से अलग होने पर मजबूर कर दिया | कहते है कि फ़िल्म के एक द्रश्य में दिलीप कुमार साहब ने मधुबाला जी को सच में थप्पड़ मार दिया था, पर मधुबाला जी ने उसे फ़िल्म के एक SCENE के रूप में ही लिया | दिलीप कुमार जी ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि वे दोनों एक दुसरे से बात भी नहीं करते थे, पर शूटिंग के वक़्त PROFESSIONALY काम करते थे |



CONCLUSION



भारतीय सिनेमा आज कहाँ से कहाँ पहुँच गया है | जहाँ आज १००-२०० करोड़ का सिनेमा आसानी से बना दिया जाता है वहाँ १९४०-१९५० के दशक में १०० करोड़ के बराबर का महान सिनेमा बनाना वाकई एक बहादुरी का काम था | मैं तारीफ करता हूँ उस महान निर्देशक K.ASIF साहब और उनकी पूरी TEAM की जिन्होंने भारत देश को MUGHAL-E-AAZAM के रूप में WORLD CINEMA का वो हीरा दिया जिसकी चमक इतिहास के पन्नों में हमेशा अमर रहेगी |










                                                                                                           RAJ VEER KHANNA

Mughal-E-Aazam unknown facts Mughal-E-Aazam unknown facts Reviewed by World Cinema on March 03, 2019 Rating: 5

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